shardiye navratri 16 10 26 bari mata shringar darshan
flag of badi mata ji offered by rswm
आरएसडब्ल्यूएम खरीग्राम गुलाबपुरा के द्वारा गत 16 सालों से पदयात्रा के साथ बड़ी माता जोत लेकर के जयकारे के साथ झंडा चढ़ाने आते हैं इस वर्ष भी खूब धूमधाम से भक्तजन पधारे
devotees reached the court of bari mata ji by walking from bandanwada
धार्मिक आस्था और श्रद्धा के साथ बांदनवाड़ा से पैदल यात्रा कर श्रद्धालु प्रातःकाल बाड़ी माता जी के दरबार पहुंचे। यहां भक्तों ने माता रानी के दर्शन कर परिवार एवं क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की।

शारदीय नवरात्रि 2026

बाड़ी माता मंदिर का इतिहास

bari mata bijainagar

संवत् 1514 से चली आ रही आस्था, परंपरा और सेवा

बाड़ी माता मंदिर, जिसे बाड़ी माता तीर्थधाम के नाम से भी श्रद्धापूर्वक जाना जाता है, कई पीढ़ियों से श्रद्धा, आस्था, परंपरा, वीरता, त्याग और सेवा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उपलब्ध ऐतिहासिक एवं परंपरागत विवरणों के अनुसार बाड़ी माता की प्राचीन प्रतिमा संवत् 1514 में बूंदी जिले के झराणा गांव से बाड़ी लाई गई थी। समय के साथ यह पवित्र स्थान एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ और आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन एवं पूजन के लिए यहां पहुंचते हैं।

बाड़ी माता धाम का इतिहास केवल मंदिर की स्थापना तक सीमित नहीं है। इसके साथ स्थानीय धार्मिक परंपराएं, देवा जी झुंझार और गोमा सती की वीरगाथा, निष्ठावान सेवा परंपरा तथा गौसेवा का एक समृद्ध इतिहास जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि बाड़ी माता तीर्थधाम श्रद्धालुओं के लिए आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।

कैसे बना देश का सबसे चमत्कारिक मंदिर ?

गुरुदेव चुन्नीलाल टाक
गुरुदेव चुन्नी लाल टाक

अदभुत व्यक्तित्व का जीवन परिचय

एक अनूठा व्यक्तित्व “सर्वभूत हितैरता :-”

एक गृहस्थ सन्यासी, उच्च राजपत्रित पदों पर आसीन होते हुए भी सम्पूर्ण कामनाओं का परित्याग कर, आधाशक्तिः जगद्जननी माँ भगवती दुर्गा की आराधना में सर्वभावेन् समर्पित व्यक्तित्व, गौभक्त, भरे पूरे परिवार के मोह से निवृत्त हो सर्व समाज की पीड़ा हरने हेतु जीवन समर्पित, एक निर्जन, अस्त व्यस्त स्थान पर बाड़ी माता को एक भव्य स्थल में रूपान्तरित कर उसके वैभव को सर्वत्र प्रसारित करने में अनोखा प्रयास निष्काम, कर्मठ, त्यागमय जीवन, कठोर श्रम बिन्दुओं से सींचकर कुसुमित पल्लवित करने का प्रण सेवाभावी सरल, मृदुल स्वभाव, सादगी पूर्ण जीवन का श्रेष्ठ उदाहरण- ऐसे महामानव का जन्म सीकर जिले का नेछवा गांव में कार्तिक सुदी चवदस सम्वत् 1992 दि. 9 नवम्बर 1935 में गुरुदेव का जन्म हुआ । इनकी माता का नाम श्रीमती राधादेवी पिता श्री रूपचन्द थे । इनकी पत्नी श्रीमती सावित्री एवं दो पुत्र व दो पुत्रियां है ।

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